मेरे अनुभव

अमृतेश्वरी नमः

     प्रिय पाठको जैसा की आप सब जानते है की हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी है, पर मेरी मातृ भाषा भी है तो मैंने सोचा की क्यों ना हिंदी में कुछ लिखा जाये। मैं कोई पेशावर लेखक नहीं हु इसलिए कोई समाज या किसी और पर टिप्पणी नहीं करूँगा, मैं सिर्फ और सिर्फ अपने बारें में बोलूँगा। ज्यादा कुछ नहीं मात्र अपने भावों को प्रकट करना चाहता हूँ और कैम्पस ब्लॉग से बेहतर क्या हो सकता है । मैं अपने अनुभव जो की मुझे अमृतापुरी में आने के बाद हुए है वो आपके साथ बाटना चाहता हूँ । यदि किसी को लगे की ये समय की बर्बादी है तो कृपया कर अपना अमूल्य समय नष्ट ना करें, क्योकि यहाँ कोई जादू नहीं होने वाला और ना ही यहाँ बॉलीवुड की कोई चटपटी खबर आएगी ये मेरे अनुभव है जो की बहुत ही सरल और सहज है ।
      पहली बार मैं अपने घर से दूर कही जा रहा था दूर मतलब थोडा दूर नहीं पूरे-पूरे २००० किलोमीटर अपने आगे की पढाई के लिए, और मेरा गंतव्य था केरल। ट्रेन जैसे केरल में प्रवेश की चारो और हरियाली ही हरियाली, रेल की पटरी के दोनों ओर रंगबिरंगे घर ऐसा लग रहा था की मैं भारत से किसी दुसरे देश में आ गया क्योकि मैंने कभी नहीं सोचा था की भारत में भी इतनी हरियाली कही होगी। जब पेड़ खत्म हो तो सिर्फ पानी नज़र आये सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था । पहली बार केरल आ रहे थे तब हमें ये नहीं मालूम था की अमृतापुरी कोल्लम से नहीं कयांकुलम से नजदीक है । तब मैं ओर मेरा मित्र मोहित हम दोनों कोल्लम में ही ट्रेन से उतर गए ओर अमृतापुरी का पता पूछने लगे। फिर हम यहाँ आये आश्रम में २ दिन रहे, हमारा इण्टरव्यू था वो पूरा किया ओर अंत में हम दोनों ने अमृतापुरी ज्वाइन कर लिया । फिर हम दोनों दोबारा जब आये तो हमें हॉस्टल में ठहरना था, हम दोनों को एक ही रूम मिल गया आज भी हम दोनों एक भी रूम में है। हॉस्टल में हमें कई अनुभव हुए जैसे इसके पहले कभी मेरा केक काट कर जन्मदिन नहीं मना था पर हॉस्टल में हम सरे दोस्त मिलकर रात को १२ बजे केक कट कर मेरा जन्मदिनमनाया जो अनुभव हुआ वो अविस्मरणीय है ।
      हॉस्टल में ढेर सारी मस्ती ओर परीक्षा के समय संजीदा तोर पर पढाई ये सब अब हमें आ चुका था । कभी गुस्सा कभी प्यार, कभी लड़ाई कभी झगडा सब कुछ देखा, एक बात तो बोलना भूल ही गया की यहाँ जो मेरे दोस्त है उनको हिंदी बहुत कम आती थी जिसे आती है तो उसे बहुत अच्छी आती है ओर नहीं तो नहीं पर कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योकि हम सब का काम चल जाये इतनी तो इंग्लिश आती है । ना तो वो लोग विलायत से आये है ओर ना हम तो बस काम चल जाता है ओर हमें कौनसा वाद विवाद करना है । कॉलेज मुझे ओर मोहित को बहुत पसंद आया पर झूठ नहीं बोलूँगा पढाई कठिन लगती थी अभी भी है पर अब आदत पद गयी है, पर ये सब वैसा ही है की जब तक सोने को आग में तपाओगे नहीं उसका रंग नहीं निखरेगा । यहाँ रह कर होली, दिवाली और सारें त्यौहार मनाये पर कभी घर वालो की कमी महसूस हो तो कभी उनकी याद आये, वो पल बहुत कठिन थे । पिछली बार की बात है दिवाली थी मेरे बड़े भाई जो की सेना में है जब से वो सेना में गए है ११ साल के बाद पहली बार वो दिवाली पर घर पर थे, और मैं पहली बार नहीं था । जब रात को घर पर फ़ोन किया तो माँ की आवाज सुन कर आँख में आशु गया जब वो बोली की आज भइया है पर तू नहीं । मुझे बहुत बुरा लग रहा था पर कॉलेज में सारें दोस्त थे ज्यादा तर उत्तर के पर कुछ दक्षिण के भी थे, वहां पटके चलाये, पर घर घर होता है ।
      एक बार की बात है मैं अपने एक मित्र के घर गया था त्रिवंद्रम में उसके घर गया उसकी माँ को देखा तो लगा की मैं अपने घर पहुच गया हूँ पर वहां भी दिल की बात दिल में रह गयी, मैं उन्हें अम्मा कहताहूँ पर आज फिर भाषा की बाधा ने मुझे हरा दिया मेरा दिल किया की मैं अम्मा से खूब सारी बातें करू पर शायद ये मुमकिन नहीं था । पर उनके भाव से इतना प्रेम मिला जो की सब्दों में कहना मुश्किल है । लगता है जब तक मेरा MCA पूरा होगा मेरा पास बहुत सारी मीठी मीठी यादें होंगी। अभी के लिए बहुत लिख चुका यही आप लोगो को अच्छा लगे तो आगे भी लिखना चाहूँगा बाकि सारी बातें आप के कमेंट्स मुझे बता देंगे, फिलहाल चलता हूँ ।

About Chanchal

Hi friends I am doing MCA whenever I get spare hours I like to click and share my opinion and experiences with the open world. I like people who gives me suggestions and those also who didn't speak in my favor. I invite both of them. Thank you that's all I wanted to say!

Subscribe

Subscribe to our e-mail newsletter to receive updates.

,

3 Responses to मेरे अनुभव

  1. munnu October 18, 2010 at 11:38 AM #

    grt job hindi
    rocked…………………………….

  2. Ambili Raj October 25, 2010 at 10:02 AM #

    Hey Rishu..
    I read it..kk
    It was really nice..
    I hope u’ll have more sweet experiences during ur stay here..
    So that u can write all of ‘em..
    Dont stop writing K…

  3. clarissa thomas October 27, 2010 at 10:51 AM #

    sweet memories never say never they will be behind you
    all the very best for your future

Leave a Reply


*